प्रभुचरणों के दिव्य स्पर्ष से पुलकित है जो स्थान।
उस नगरी की महिमा का अब आओ सुनें बखान।।

अनुपम अद्भुत अद्वितीय है प्रभु का यह दरबार।
इसकी तुलना में फीका पड़ता सारा संसार।
श्रीसमाधि के दर्शन से मिटते सब क्लेश विकार।।
सकलमतस्थापक श्रीप्रभु की बोलो जयजयकार।।

गुरुगंगा विरजा संगम है शिष्य-गुरु का मिलाप।
इस संगम के दर्शन से ही धुल जाते सब पाप।
दंडपाणि सर्वेश्वर शिव हरते हैं भव भय ताप।
यम भी कांपे थर-थर सुनकर इनका शौर्य प्रताप।।

औदुंबर की छाया में श्रीदत्त का सन्निधान।
शब्द नहीं कर सकते इनकी महिमा का गुणगान।
कल्पवृक्ष प्रभु संप्रदाय का सुंदर सघन विशाल।
इसकी छाया में जो-जो बैठे वो हुए निहाल।।

सदा अन्नपूर्णा माता का रहता यहॉं निवास।
होती है इनके प्रसाद में अद्भुत दिव्य मिठास।
पंचमूर्ति शिव श्रीनारायण दुर्गा सूर्य गणेश।
शीघ्र तुष्ट होकर करते भक्तों पर कृपा विशेष।।

भक्तों की रक्षाहित तत्पर वीर सुभट हनुमंत।
रामनाम जपने वालों से करते प्रेम अनंत।
शरणागत की विपदाओं का क्षण में करते अंत।
इनके आश्रय में निर्भय सब साधू संत महंत।।

प्रभुनगरी का शक्तिपीठ यह अति जाज्ज्वल्य महान्‌।
आदिशक्ति मधुमती श्यामला व्यंकम्मा का स्थान।
व्यंका माता दीन जनों की एकमेव आधार।
आश्रित प्रभु भक्तों के करतीं सभी स्वप्न साकार।।

कोतवाल प्रभुनगरी के कालाग्निरुद्र हनुमान।
रिपुओं का निर्दालन करना इनका कार्य प्रधान।
अपने कंधों पर ढोते हम भक्तों का अभिमान।
रखें सुरक्षित नगरजनों की आन बान औ शान।।

मल्लारी मार्तंड हमारे मणिगिरि के सम्राट।
दुष्ट दमनहित हुए अवतरित धरकर रूप विराट।
ज्ञानखड्ग की आभा का फैला सर्वत्र प्रकाश।
येळकोट के गर्जन से गूंजे सारा आकाश।।

यही हमारी काशी मथुरा यह है गोकुल ग्राम।
यह अवंतिका यही अयोध्या यहीं हमारे राम।
सकलतीर्थ हैं बसे यहॉं, यह प्रभु का पावन धाम।
इधर उधर मत भटको भाई करो यहीं विश्राम।।

दिव्य अनोखे इस नगरी के जाग्रत देवस्थान।
नित नियमित दर्शन से होता भक्तों का कल्याण।
अलग अलग विग्रह प्रतिमाऍं नाम रूप पहचान।
छिपा हुआ सबके भीतर चैतन्य एक भगवान्‌।।

चैतन्यराज प्रभु