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ज्ञानामृताचा प्रवाह

ज्ञानामृताचा प्रवाह

ह्या प्रवचनमालिकेमुळे सामान्य जनांना निश्चितच श्रीमद्भगवतगीतेप्रती कुतुहल निर्माण होऊन वाचनाची, समजण्याची निश्चितच प्रेरणा मिळेल, ज्यांनी आधी वाचलीय अशांना त्याचा अर्थ अधिक सुस्पष्ट होईल असा आशावाद व्यक्त करतो.

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ज्ञानाचे अंखड स्त्रोत

ज्ञानाचे अंखड स्त्रोत

नारद भक्ति सूत्रात नारद मुनींनी म्हटले आहे की परमेश्वराच्या कृपेशिवाय महापुरुषांचा संग प्राप्त होत नाही. नक्कीच श्री माणिक प्रभूं ची आम्हा सर्वांवर कृपा आहे म्हणूनच आम्ही या गीता ज्ञान यज्ञात सहभागी होऊ शकलो.

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ज्ञान प्रबोध

ज्ञान प्रबोध

परम पूज्य श्रीजी, अधिक मास के निमित्त गत तीस दिनों से  हम सभी को आपके कारण, गीता ज्ञानयज्ञ का लाभ लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हम प्रभुभक्तों

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श्रीमधुमती पंचरात्रोत्सव

श्रीमधुमती पंचरात्रोत्सव

योगिनी व्यंकम्मा ने आजीवन श्रीप्रभुचरणों की सेवा की तथा प्रभुमहाराज के प्रति असीम श्रद्धा-भक्ति के फलस्वरूप परमपद को प्राप्त हुईं।

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गुरुमंत्र

गुरुमंत्र

एक राजा था। उसके राज्य में एक साधु रहा करता था। राज्य के अनेक लोग उस साधु के शिष्य बन गए थे। साधु की कीर्ति राजा तक पहुँची। राजा के मन में उस साधु से मिलने की इच्छा जागृत हुई और एक दिन राजा उस साधु के आश्रम में जा पहुँचा। राजा ने साधु को नमस्कार किया और कहा –...

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कां रे मना अल्लड धावसि तू

कां रे मना अल्लड धावसि तू

कां रे मना अल्लड धावसि तू टाळुनि गुरुच्या मार्गाला विसरुनि श्रीगुरु भजनाला वृथा रमसि भव नादी रे॥१ ॥   विषयांच्या नादात अडकुनी व्यर्थ दवडिसी जीवन हे गुरुचरणी तू लाग त्वरेंने जाय समुळ भवव्याधी रे॥२॥   मूढ मना किति सांगू आता धरि तू श्रीगुरु चरणा रे सिद्धज्ञान...

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